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बेवक़्त उसके ख्यालों में खो जाना मोहब्बत हैं

बेवक़्त उसके ख्यालों में खो जाना मोहब्बत हैं, उसके आँखों में खुद को पाना मोहब्बत हैं, छुप छुप के उसे निहारना मोहब्बत हैं, उसके सामने आते ही नज़रे चुराना मोहब्बत हैं, अचानक से उसका हाथ थामना मोहब्बत हैं, उसकी बिखरी हुई लटो को सवारना मोहब्बत हैं, अपने हर सपने में उसे तकना मोहब्बत हैं, उसकी एक हँसी के ख़ातिर हद से गुजर जाना मोहब्बत हैं, बेवक़्त उसके ख्यालों में खो जाना मोहब्बत हैं,                                               - अभिषेक दूबे      

मैं शराब और शाम

कल शाम जब पहली बार मधुशाला पर पहुंचा तो जिन्दगी की तनहाई का एहसास हुआ, न जाने कितने लोग अपने सारे ग़म भुला कर नशे में डूब जाने को व्याकुल थे, मैंने भी ऑर्डर दिया। जब मदिरा की पहली बूंद गले से उतरी तब जिन्दगी की कड़वाहट का अंदाजा लगा। कड़वाहट धीरे धीरे कम हो रही थी, और मैं नशे मे डूबता चला जा रहा था। नशे मे दुनिया कितनी रंगीन लगती है, वो आज पता चला। इस खुबसूरत सी शाम में मैं अकेला बैठा था अपने अकेलेपन के साथ। मुझमें और मेरे अकेलेपन में बेहद ही करीबी रिश्ता है, बहुत ही गहरे दोस्त है हम दोनों। जब भी मैं थक जाता हूं, दुनिया से हार जाता हूं, ये मुझे अपने गले से लगाता है। यह मुझे मेरी कमजोरीयों की गहराइयों मे ले जाता है, जहां हम दोनों के सिवाय कोई नहीं होता। यह मुझे मेरे खोखलेपन का एहसास दिलाता है। वहां ना जीने का मोह होता है ना ही मरने का खौफ, ना कुछ पाने की उम्मीद होती है, ना कुछ खोने का डर, ना कोई हर्ष, ना कोई शोक, बस आनंद ही आनंद.............. मैं इन्हीं सब उलझनों में खोया हुआ था, कि तभी मेज पर रसीद रखते हुए वेटर ने आवाज दी साहेब मधुशाला बन्द करने का वक़्त हो गया.....। ABhishek...

हरकत करती है अंखिया तेरी...

हरकत करती है अंखिया तेरी, सबसे नजर बचा के, कोई देख ना सका इन्हें, दिल ले गयी चुरा के। सोचते हैं जब हम कुछ भी, आती है तेरे नाम की, हिचकी, दिल के हर तार, तुझसे जुड़ गए, जिंदगी के हर रुख़, तेरी ओर मुड़ गए। ऐसा चला जादू, मन हो गया बेकाबू, खुद का ना कुछ खबर है, ये तो प्यार का असर है, दिल धड़कता है धक-धक, जब तु देखे शरमा कर, पलकें झुका कर, नजरे बचा कर। हरकत करती है अंखिया तेरी, सबसे नजर बचा के, कोई देख ना सका इन्हें, दिल ले गयी चुरा के।

प्रेम पत्र

प्यार एक ऐसा शब्द जोकि एक शब्द नहीं एक भावना है, एक ऐसी भावना जिसे अल्फाजो में बयां करना नामुमकिन है। मैं अपने भाव, विचार, अपने दिल की बात, अपने जज्बात, अपने अल्फाज, अपनी प्रेरणा को शब्दो मे पिरो कर पन्नों पे लिखने की नाकामयाब कोशिश कर रहा हूँ। प्रिये, तुम्हारा नाम मात्र सुन लेने से, मेरे चेहरे पर मुस्कुराहट लौट आती है, मैं हमेशा तुम्हारे विचारों, तुम्हारे ख्यालों, तुम्हारे ख्वाबों मे ही डूबा रहता हूँ। मैं तुम्हारे साथ अपने दिल की वो हर बात सांझा करना चाहता हूं, जो शायद मैंने कभी किसी और के साथ ना की हो। मैं तुम्हारे साथ उस हर लम्हे को जीना चाहता हूं जिसे शायद आज से पहले मैंने कभी ना जिया हो। अपने हर र्दद मे तुमे याद करता हूँ, अकेलेपन मे तुमे अपने पास महसूस करता हूँ, मेरे नजर की तलाश हो तुम, जिसे सदियों से मांग रहे हैं, वो मुराद हो तुम... ABhishek Dubey
कब तक शिकंजो में जकड़े रहोगे सियासत की,  अब तो उठा लो खन्जर मोहब्बत की..... 

तेरह बरस की उमर मे...

तेरह बरस की उमर मे कीतनो की तेरहवीं देख ली, फिर भी लोग मर रहे हैं, लम्बी उम्र की तरस में..... ABhishek Dubey

जिंदगी...

जिंदगी... चिंता, फ़िक्र, कद्र, प्यार, ख्वाब, इज़्ज़त, जज़्बात, और तेरा साथ....... ABhishek Dubey