Ek Messege
एक मैसेज की ही तो बात थी, इतनी क्या नाराज़गी । जानती हुँ कि व्यस्त हो, पर 1 मिनट का समय तो होगा ना, और ज्यादा नही पूछा बस खाना खा लिया, यही तो पूछा था अब इस बात पर इतनी नाराज़गी ।
तुम्हारी फिक्र रहती है , और तुम्हारे खाने के बाद ही तो मैं खाती हूँ, ये बात तुम अच्छी तरह जानते हो तब भी नाराज़ हो जाते हो। निम्मी ने इतनी बात करके फ़ोन कट कर दिया, सुमित को समझ आया, और एक मैसेज किया कि सॉरी, यहाँ बहुत काम है खाना खाने का वक़्त भी नही है, तुम खा लेना मेरा इंतज़ार मत करना। निम्मी ने मैसेज रिसीव तो कर लिया पर कोई रिप्लाई नही दिया , और अपने काम निपटाने लगी। शाम को जब सुमित आया तो निम्मी ने कहा कि फ़्रेश हो जाओ मैं चाय बना देती हुँ। सुमित ने उसको रोका और बोला कि खाना लगाओ साथ में खायेंगे, बाद में कोई बात होगी।
दिनभर से थकी हुई निम्मी ने हामी भर दी, और चल पड़ी किचन की ओर..
सुमित जानता था कि निम्मी उससे नाराज़ है, दिनभर से कुछ नही खाया होगा, पूरा काम निपटा रही होगी, इसलिए उसने निम्मी को साथ में खाने का कहा, ताकि निम्मी की नाराजगी भी दूर कर पाए और उसे बता पाए कि उसे भी फिक्र है।
खाना लग गया है आ जाओ, निम्मी ने आवाज़ दी। सुमित बिना देर किए टेबल पर पहुँच गया और निम्मी से बोला कि बैठो आज मैं तुम्हे अपने हाथों से खिलाऊंगा, और थाली में खाना रखा, एक निवाला लिया और निम्मी की ओर बढ़ाया , अब निम्मी की नाराजगी भी कम हो गयी थी, सुमित ने उसे फिर से सॉरी बोला और कहा कि थैंक्यू मेरा इतना सारा ख्याल रखने के लिए, पर अपना ख्याल भी रखा करो और अगर मेरे मैसेज का कोई आंसर ना आये तो थोड़ा इंतज़ार कर लिया करो, मैं जरूर आंसर करूँगा, निम्मी के हाथों को खुद के हाथ मे लिया और बोला कि तुम ही तो कहती हो ना work is workship.
निम्मी रो पड़ी, पर इस बार निम्मी सुमित से नाराज़ नही थी, बस जज़्बात में बह गई कि सुमित को भी उसकी फ़िक्र है।
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