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Showing posts from February, 2019

Success means many wonderful positive...

Success means many wonderful positive things. Success  means personal prosperity: a fine home, vacations, travel, new  things, financial security, giving your children maximum advantages. Success means winning admiration, leadership, being looked up to by people in your business and social life. Success  means freedom: freedom from worries, fears, frustrations, and  failure. Success means self-respect, continually finding more real  happiness and satisfaction from life, being able to do more for  those who depend on you.  Success means winning.  Success~achievement~is the goal of life!  Every human being wants success. Everybody wants the  best this life can deliver. Nobody enjoys crawling, living in mediocrity. No one likes feeling second-class and feeling forced to go that way. Note- The following lines mentioned above do not have any kind of relationship with ABhishek Dubey These lines is taken from a Novel.

Woh pyar he kya jisme...

Woh pyar he kya jisme,   gustakhiyan na ho Woh pyar he kya jisme,  galatiya na ho, Woh pyar he kya jisme , sararate na ho, Woh pyar he kya jisme, sokhiya na ho, Woh pyar he kya jisme, mastiya na ho, Woh pyar he kya jisme, Najdikiya  na ho, Woh jindgi he kya jisme, pyar  na ho, Aur woh pyar ki kya jisme, tum na ho,  Aur woh tum he ky jisme,  hum na ho....

दिमाग भले आई.एस.आई और पाकिस्तान में बैठे आतंक के आक़ाओं के हों...

दिमाग भले आई.एस.आई और पाकिस्तान में बैठे आतंक के आक़ाओं के हों, आतंक को ज़मीन पर उतारने वाले हमारे अपने ही देश के युवा हैं। घाटी में सक्रिय ज्यादातर आतंकी कश्मीरी हैं। आतंकियों के समर्थन में सुरक्षा बलों पर पत्थर चलाने वाले भी कश्मीरी हैं। अलगाववाद का समर्थन करने वाले, पाकिस्तान के पैसे से आतंक और भारत विरोधी गतिविधियों का प्रत्यक्ष या परोक्ष संचालन करने वाले और हाथों में पाकिस्तानी झंडे देकर पत्थरबाजों की फौज खड़ी करने वाले हुर्रियत के तमाम लोग कश्मीरी हैं। पिछले तीन दशकों का अनुभव बताता है कि सरकार किसी भी दल की हो, कश्मीर को कत्लगाह में तब्दील कर डालने वाले पाकिस्तान को सबक सिखाना उनके बस की बात नहीं रही है। इसके लिए इंदिरा गांधी जैसी एक दबंग नेता की ज़रूरत है जो वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में कहीं नहीं दिखता। हां, हमारी सरकार यदि चाहे तो अपना घर ज़रूर ठीक कर दे सकती है। अगर कश्मीर घाटी में आतंकियों के ख़ात्मे का अभियान जारी रखने के अलावा हुर्रियत के सभी गुटों को प्रतिबंधित करने के बाद उनके तमाम नेताओं के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज़ कर सरकार उन्हें देश के दूरदराज के जेलों में डाल सके तो...

कल से पुलवामा अटैक पर लोगों के रियेक्शंस देख रहा हूँ...

कल से पुलवामा अटैक पर लोगों के रियेक्शंस देख रहा हूँ.. लोगों का आक्रोश जरूर कहीं कुछ छुपे बैठे लोगों को अहसास दिला रहा होगा कि 'इस क्षेत्र में अभी स्कोप है'.. और इस तर्ज पर अगर हम आगे और सैनिक खोयें तो कोई ताज्जुब नहीं होना चाहिये। एक सैनिक की तो यह नियति (दुर्भाग्य कह लीजिये) ही होती है कि वह मोहरे की तरह इस्तेमाल हो.. 42 सैनिकों की शहादत दुर्भाग्य पूर्ण है लेकिन अपने आक्रोश के बीच एक पल के लिये सोचियेगा जरूर कि आतंकी हमले के इनपुट के बावजूद यह घटना कैसे घट गयी और किसी काॅनवाय के गुजरते वक्त जब अमूमन सड़क को सुरक्षित और खाली कर लिया जाता है तब एक विस्फोटकों से भरी कार कैसे वहां मौजूद रह गयी? हर आक्रोशित भारतीय फौरन बदले की कार्रवाई चाहता है.. बदला.. किससे? पाकिस्तान का हाथ है, वह सबको पता है लेकिन यह आत्मघाती आतंकी हमला था न कि कोई सैनिक कार्रवाई, फिर पाकिस्तान से कैसे बदला लेने चल देंगे.. खासकर तब, जब वह भी हमारी तरह एक न्युक्लियर पावर है। फिर किससे बदला.. उस संगठन से जिसके लोग कोई विशेष पहचान लिये सामने नहीं, तो उनके चक्कर में किस किस को मार देंगे? अगर आतंकवाद दमनात्मक का...

Tere mere pyar ke charche har juban pe hain...

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               Meri kismat ki kali bhi, kaisi khili hai, mujhe tum jaisi jeewan sathi mili hai, meri subhah ka, meri sham ka, mere din ka, meri rat ka, tum khyal rakhti ho, meri har baat ka, meri mood ka, meri sehat ka, meri chahat ka, tum khyal rakhti ho meri sukun ka, meri rahat ka, mai kitna khuskismat hu ki, mujhe mila hai tumhara sath , kauki tum jan leti ho meri maan ki har baat...             ABhishek Dubey                                                   

Review on Uri : the surgical strike

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             इतने दिन बाद उरी देख कर  आज   फिल्म का रिव्यु दे रहे हैं ..........असल में क्या है की हम engineering वाले ऐसी जिन्दगी ही जीते हैं की देश दुनिया में क्या हो रहा है पता ही नहीं चल पाता ...अब कल समय मिला तो कल ही पहुच गए फिल्म देखने ........मुद्दा ये नहीं है की फिल्म कैसी है ...मुद्दा ये हैं की ये फिल्म बनी ही क्यों ??.... हमारे 20 जवान ..जो की काश्मीर के उरी सेक्टर में बने सेना के कैम्प में सो रहे थे ...उन्हें उठने का मौका भी नहीं मिला ......लश्कर के चार आतंकियों ने अंधाधुन्द गोलियां बरसा कर उन्हें उस भोर का सूरज भी देखने नहीं दिया ........इसी घटना के 10 दिन बाद भारतीय सेना ....रा ..और भारत सरकार के निर्देशन में pok में एक सर्जिकल स्ट्राइक की गयी थी जिसमे 40 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक और आतंकी मारे गए और pok में बने उनके कई कैम्प्स को भारतीय सेना ने तबाह कर दिया ......... मैंने दो साल पहले आखिरी बार हॉल में लगी फिल्म रुस्तम देखि थी ..इसके बाद कल उरी देखने गया ....फिल्म देखने के बाद जब आप हाल से बाहर निकलेंगे तब भी आपको लग...

"एक प्यार ऐसा भी....

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                    नींद की गोलियों की आदी हो चुकी बूढ़ी माँ नींद की गोली के लिए ज़िद कर रही थी। बेटे की कुछ समय पहले शादी हुई थी। बहु डॉक्टर थी। बहु सास को नींद की दवा की लत के नुक्सान के बारे में बताते हुए उन्हें गोली नहीं देने पर अड़ी थी।. जब बात नहीं बनी तो सास ने गुस्सा दिखाकर नींद की गोली पाने का प्रयास किया। अंत में अपने बेटे को आवाज़ दी। बेटे ने आते ही कहा,'माँ मुहं खोलो। पत्नी ने मना करने पर भी बेटे ने जेब से एक दवा का पत्ता निकाल कर एक छोटी पीली गोली माँ के मुहं में डाल दी। पानी भी पिला दिया।गोली लेते ही आशीर्वाद देती हुई माँ सो गयी।. पत्नी ने कहा , ऐसा नहीं करना चाहिए।' पति ने दवा का पत्ता अपनी पत्नी को दे दिया। विटामिन की गोली का पत्ता देखकर पत्नी के चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी। धीरे से बोली आप माँ के साथ चीटिंग करते हो। ''बचपन में माँ ने भी चीटिंग करके कई चीजें खिलाई है। पहले वो करती थीं, अब मैं बदला ले रहा हूँ। यह कहते हुए बेटा मुस्कुराने लगा।"  🙏🌹Priyam Tiwari 🌹🙏