तुम ख्वाब हो...


तुम ख्वाब हो,
तुम जज़्बात हो,
अल्फ़ाज़ हो,
मेरे दिल की आवाज़ हो ...
जो बसी है मेरी आँखों में,
मेरी साँसों में,
मेरी कशिश में,
मेरी रिवायत में,
मेरे  अर्श में,
मेरी सोहबत में,
रफ़्ता रफ़्ता तुम बस गयी हो
मेरी रूहानियत में...





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