Khamoshi

   
           

        


बात १५ मई २०१६ की है, उस रोज शाम को बसंत भइया की दुकान पर चाय पी रहा था। गर्मी के दिन थे, बच्चे अपनी मस्ती में झूम रहे थे, कई लोग खेतों से वापस आ रहे थे तो वहीं कई अपने काम से लौट रहे थे। अंधेरा संकेत दे रहा था कि अब घर लौट चल मुसाफिर।
आज ही बारहवीं के रिजल्ट आज थे, जैसे- तैसे करके पास तो हो गया था लेकिन अंक घर वालों की उम्मीदों से बहुत दूर कही गहराइयों मे थे। साथ के सभी दोस्त खुश थे सिवाय मेरे।
मैं खामोशी के मंज़र मे इस कदर डूब चुका था कि, चाय की प्याली कब ठण्डी हो गयी पता ही नही चला। शाम की ठण्डी हवा बदन की गर्मी को कम करने के लिए काफी नही थी।
तभी ऐसा लगा कि, किसी ने समुन्दर की लहरों को रोकने की कोशिश कर रहा हो और कानों मे आवाज़ गूंजी, "क्यो सुना है तुम्हारा रिजल्ट आया है.... कैसा रहा.....अच्छा ही रहा होगा",
ये सवाल पान की पिचकारी मारते हुए मुंशी बाबा ने लगाई थी। उनके सवालों की संख्या बढ़ती जा रही थी और मैं कांपते हुए हाथों से चाय की प्याली थामें हुए उनकी आंखों से आंखें मिलाने की नाकामयाब कोशिश कर रहा था। कुछ देर बाद वो हांफने लगे और मेरी तरफ से कोई जवाब ना पाकर खुद ही बोल पड़े, "पिंटू को लल्ला हुआ है, शाम को दावत रखी है आकर खाना खा लेना " और इतना कह कर वहां से चले गए।

अंधेरा धीरे धीरे बढ़ रहा था, घर जाने का मन तो नही था लेकिन ना जाने की हिम्मत भी नहीं थी। अब कदम घर की तरफ बढ़ चुके थे, कपड़े बदन में कांटों की तरह चुभ रहे थे, घर की दूरी ज़्यादा तो नही थी फिर भी न जाने क्यूं आज बढ़ सी गई थी। 
मां दरवाजे पर खड़ी रास्ता निहार रही थी, मां ने पूछा कहां थे, "मैंने आंखों मे आंसू छुपाते हुए सर हिला कर कहा..... कहीं नहीं बस ऐसे ही"
लेकिन मां से सच्चाई कहां छुपती है, मां ने आंचल से लगा लिया और मेरे आंसुओं से मां की ममता भीग गई। मां ने प्यार से पुचकारा और कहा, "बाबू यूं हौसला नही हारते"।

मैं मां की गोद में सर रख कर आसमान की तरफ देखने लगा,
तारे टिम टिमा रहे थे,
मैं उनमें अपनी खुशियां ढूंढ रहा था,
मां सर पे हाथ फेर रही थी।
                                                                    To be Continued................................
                       


                                                                                      ABhishek Dubey

Comments

  1. Waah mere bhai kya gajab likhe ho👌👍..aisa ehsaas ho raha hai ki main us drishya ko tumhare samne khade hokar wo sab dekh raha hu...very nice👍👍👌

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  2. this story has touched my core of heart

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  3. Kya bat h, I hope you will be a good writer with an engineer.

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