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Showing posts from October, 2018

आज हसता हूँ मैं खुदपर क्यूँ

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आज हसता हूँ मैं खुदपर क्यूँ । समय की बवंडर में फसकर क्यूँ ।। वक़्त ही देता है कमियो से सिख फिर भी करता है इंसान गलतिया अक्सर क्यूँ समय की रेखा ने मुझे तोडा या मेरे अपनों के अविश्वास ने अक्सर ये सवाल अकेले में उठता है क्यूँ आज हसता हूँ मैं खुदपर क्यूँ । समय की बवंडर में फसकर क्यूँ ।। यूँ तो कमियां होती है सबमे,मेरे में भी है  पर कमियों को अकेले कुबूल मैं करता हूँ क्यूँ रिश्तों की डोर दोनों ही तरफ होती है पर अकेला सम्भालने में अक्सर उलझा मैं रहता हूँ क्यूँ आज हसता हूँ मैं खुदपर क्यूँ । समय की बवंडर में फसकर क्यूँ ।। अपनी कलम से... डॉ. अजय कुमार मिश्र

मानव ....क्यूँ ऐसा क्यूँ

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आज अभी खुले आसमान के नीचे लेट जब तारो को देखा तो ख्याल आया कि इनकी वास्तव में नियति क्या है?? रोज रात निकल आते है और सुबह होते ही गायब हो जाते है ।  बहुत देर सोचा तो पाया कि इनसे भी बहुत बड़ी सीख़ मिलती है, कितना धैर्य कितना संयम कितना झुकाव है इनमे अपने जीवन के प्रति अपनी नियति के प्रति कितने दृढ है ये सब । वास्तव में सोचा तो एहसास हुआ कि इनकी यही प्रकृति है कि रात के वक़्त ही ये आते है और अपने से ज्यादा प्रकाश होने पर उनको सम्मान देते हुए कुछ समय ये मौन रहते है पुनः जैसे ही इन्हें अपना वक़्त मिलता है अपने संयम और ऊर्जा से ये पुनः चमकने लगते है । काश मानव भी अपनी प्रवित्ति में रह पाता । हर सुख के बाद दुःख , दुःख के बाद सुख आना तय है पर मानव क्यू अपनी प्रकृति भूल जाता है। दुःख में तो सबका साथ ढूंढता है मानव पर सुख की अनुभूति होते ही वो अपनी पूर्व दशा को भूल जाता है । क्यू ऐसा क्यू ??                                                       ...

एहसास जिंदगी की सच्चाई का

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      जीवन की कठिनाइयों का एहसास तब ही होता है जब हम पूर्णतया सच्चे एवं निश्चल स्वरुप में अपने जीवन को जीते हो और हमारे आसपास के माहौल से हमे वास्तव में प्रतिफल न मिलता हो। सच्चाई जीवन की आज समझ आती है,हम लाख सच्चे हो लाख हमारे अंदर अपनो के लिए प्रेम निहित हो पर हम सबके लिए वही स्वरुप रखते हो जरुरी नहीं। एक निस्वार्थी पुऱुष भी विडम्बना का शिकार तब होता है जब उसके कर्तव्यों को उसके अपने ही स्वार्थ से जोड़कर देखें। क्या करें ऐसे में एक पुरुष अपने पुरुष स्वभाव के कारन वो न ही ज्यादा झुक सकता है न ही किसी को इस बात का सबूत दे सकता है कि उसके मन में क्या सच्चाई है । ज्यादा झुकना ही आज के समय के हिसाब से लोगो को यही एहसास कराता है कि व्यक्ति का कुछ तो स्वार्थ है । बड़ी चिंतन का समय है आज जो व्यक्ति कभी अपने स्वार्थ के लिए नही जीता वही दुनिया की नजर में छोडो अपनो की ही नजर में ही स्वार्थी हो जाता है कारन सिर्फ उस व्यक्ति का मोह और प्रेम जो वो असीमित रूप में अपने परिवार के लिए रखता है। क्या कहे इसे विडम्बना ही तो है ये पुरुष के लिए जो सच्चा होकर अपने प्रेम स्वरुप में भी स्...

Dear jindgi

She- Ek sawal puchu.....      He-  Ha pucho, She- "Mujhse he pyar kyu ... He- Iska jawab toh mere pass bhi nahi hai, Kauki tumhe pagalo ki tarah,  chahne ki koi ek wajah to nahi ho sakti hai na, Wajah, muskan ho sakti hai...             Aankhe ho sakti hai, Jab meri najro se milti hai, ek ajeeb sa nasha chadne lagta hai, Par hosh toh us waqt uadte hai jab meri najar tumhare til par padti hai..... She_🤗a cute smile.......                                                             

एक विचार

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एक उच्च मानसिकता का व्यक्ति ही निम्न मानसिकता के व्यक्ति को अपनाता है इसलिए नही की उसे कुछ किसी को दिखाना है बल्कि इसलिए क्युकि ऐसे व्यक्ति में अदम्य साहस एवं भौतिक परिस्थियों से लड़ने की अदम्य शक्ति होती है। ऐसा व्यक्ति खुदपर विश्वास करता है और खुद्की प्रेरणा से जीवन में आने वाले हर विपरीत स्थिति से लड़कर निम्नता को भी अपने समान स्थिति प्रदान करता है।वही निम्न सोच का व्यक्ति उच्च सोच के व्यक्ति को हरपल त्याग योग्य मानकर मैं मैं में ही जीता है उसे लगता है कि जो भी है मेरे कारन ही सब है ये व्यक्ति भी मेरे से जुड़ने के लिए विह्वल है। जबकि सत्य इससे विपरीत ये होता है कि उच्च मानसिकता का व्यक्ति संबंधो को जीता है सम्बन्ध उच्च से हो या निम्न से ये उसके स्वभाव में सदैव समानता होती है। परिस्थितिया निम्न मानसिकता के पटल को बार बार बदलने को अग्रसित करती है वही उच्च मानसिकता का व्यक्ति एकाग्रचित होकर अपने सम्बन्धो को ही जीता है।                                             ...

रिश्ता नये जमाने के.....

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एक कटु शब्द "MOVE ON" जो तीन तलाक से भी बदतर है जिसका अर्थ ही आजका सभ्य समाज अनर्थ कर चूका है ! वास्तव मे इस शब्द का अर्थ होता है अपने कमियों को त्यागकर अपने रिश्तो के साथ समभाव बनाकर साथ चलना परन्तु आज के नए युवक या युवतिया तात्कालिक सुख को देखकर थोड़े ही कस्ट मे  एक दूजे से ये कहकर रिश्ते तोड़ रहे की मै हमारे रिश्ते में अब सुखी नहीं  "Move on " करना चाहता हूँ  या चाहती हूँ ...रिश्ते जोड़ने में वर्षो लग जाते हैं और टूटने में एक पल..संभव हो तो अर्थ का अनर्थ न करें वरना आने वाले समय में हम मानव भी पशु समान होकर किसी भी मर्यादित रिश्ते का आदर न कर पाएंगे ...वैसे भी भारत में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से बहुतायत संख्या में मर्यादा तोड़ने हेतु नए नियम प्रविष्ठ हुए है ...कोशिश करें अपने रिश्तो का मान रक्खें गर रिश्ते टूटने की कगार पर हो तो स्वयं से प्रश्न जरूर करें की जब रिश्ते तोड़ने ही थे तो जोड़ा क्यों...शायद मेरे इस लेख से किसी को दर्द हो पर छमाप्रार्थी हूँ गर किसी के ह्रदय को आघात हो परन्तु कभी अर्थ का अनर्थ समझ बने बनाये रिश्ते खोखले न बनने दें वरना एक दिन दर्द के सिवा...