एहसास जिंदगी की सच्चाई का

     


जीवन की कठिनाइयों का एहसास तब ही होता है जब हम पूर्णतया सच्चे एवं निश्चल स्वरुप में अपने जीवन को जीते हो और हमारे आसपास के माहौल से हमे वास्तव में प्रतिफल न मिलता हो।
सच्चाई जीवन की आज समझ आती है,हम लाख सच्चे हो लाख हमारे अंदर अपनो के लिए प्रेम निहित हो पर हम सबके लिए वही स्वरुप रखते हो जरुरी नहीं। एक निस्वार्थी पुऱुष भी विडम्बना का शिकार तब होता है जब उसके कर्तव्यों को उसके अपने ही स्वार्थ से जोड़कर देखें। क्या करें ऐसे में एक पुरुष अपने पुरुष स्वभाव के कारन वो न ही ज्यादा झुक सकता है न ही किसी को इस बात का सबूत दे सकता है कि उसके मन में क्या सच्चाई है ।
ज्यादा झुकना ही आज के समय के हिसाब से लोगो को यही एहसास कराता है कि व्यक्ति का कुछ तो स्वार्थ है । बड़ी चिंतन का समय है आज जो व्यक्ति कभी अपने स्वार्थ के लिए नही जीता वही दुनिया की नजर में छोडो अपनो की ही नजर में ही स्वार्थी हो जाता है कारन सिर्फ उस व्यक्ति का मोह और प्रेम जो वो असीमित रूप में अपने परिवार के लिए रखता है।
क्या कहे इसे विडम्बना ही तो है ये पुरुष के लिए जो सच्चा होकर अपने प्रेम स्वरुप में भी स्वार्थी शब्द का द्योतक बन जाता है ।





                                                        डॉ अजय कुमार मिश्र

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